बाह्य चित्र जहाँ कुछ पेड़ों के पीछे कारखाना दिख रहा है।

संगठित सामाजिक उत्तरदायित्व(आर एस सी)

पुनर्निर्माण का प्रतिरूप चित्र।

पर्यावरण के प्रति प्रतिबद्धता:

  • पर्यावरण शिक्षा तथा जागरूकता: संस्था में ही पर्यावरण प्रशिक्षण को बढ़ावा देने के लिये सतत प्रयत्न, जिसके द्वारा सम्पूर्ण तंत्र में सम्मिलित सभी व्यक्तियों को पर्यावरण सम्बन्धी ज्ञान का बोध कराया जाता है।
  • पर्यावरण की देख रेख हेतु सामाजिक जागरूकता: विद्यार्थियों समूहों के लिए, विशेषतः लोकल एजेंडा 21 के लिए मार्गदर्शित भ्रमण।
  • उपभोग में कटौती: कार्य कुशलता में वृद्धि से यह तात्पर्य कि आर्थिक बचत एवं प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग में मितव्ययता बरतना, अतएव एक तरह से सम्पूर्ण पर्यावरणीय क्रियाकलाप में मितव्ययता।
  • उत्पादन और अपशिष्ट प्रबंधन: संसाधनों की मितव्ययता का सीधा प्रभाव अपशिष्ट में कमी द्वारा परिलक्षित होता है। पुनर्चक्रीकरण अथवा पुनर्प्रयोग द्वारा इन्ही वस्तुओं का संवर्धित मूल्य प्राप्त करने में महत्वपूर्ण योगदान होता है।
  • पुनः प्राप्त कागज़ का कच्चे माल की तरह उपयोग।
दो हाथों द्वारा पृथ्वी को अवलंब निरूपण चित्र।

सामाजिक प्रतिबद्धता:

  • ऐल आई ओ एन डी ऐ यू (समान अवसरों की उपलब्धता का कानून, भेदभाव रहित एवं विकलांगों हेतु व्यापक सुगम अभिगम्यता ) कानून का पालन करते हुए अनुबंधित कर्मचारी के रोजगार में एकीकरण हेतु सामाजिक योजना।
  • उत्पादक, उपभोक्ता एवं ग्राहकों के अनुभव से उत्पाद का नवीनीकरण।
  • पारिवारिक परामर्श तथा ओवरटाइम न करवाने हेतु नीति निर्धारण।
  • सभी क्षेत्रों में परिवृद्धि के लिए सहयोग की अवधारणा।
  • वृत्ताकार अर्थव्यवस्था संगोष्ठियों में सहभागिता।
  • सभी प्रकार की लाभ निरपेक्ष संस्थाओं और संगठनों के साथ सहयोग, एवं खेलकूद तथा सामाजिक गतिविधियों का अपेक्षित समर्थन।
सूअर रूप में एक गुल्लक का प्रतिरूप चित्र।

वित्तीय प्रतिबद्धता:

  • कार्यकुशल उत्पादन प्रणाली में निवेश।
  • (एम टी डी) सर्वश्रेष्ठ उपलब्ध तकनीक के प्रयोग से जल संसाधन के उपयोग में कमी एवं अवशिष्ट पदार्थों के उचित प्रशोधन में निवेश।
  • स्थायी तथा निपुण रोजगार उत्पन्न करना।
  • एस जी पी आर ऐल (व्यावसायिक जोखिम निवारण प्रबंधन प्रणाली) का विकास एवं अनुपालन।
  • सुरक्षा, गुणवत्ता, पर्यावरण तथा प्रविधि का सतत प्रशिक्षण।